*जिंदगी*
आँखो मे चाहत ढुंडते ढुंडते
जिंदगी निकल गयी
हातो मे हात लिये कुछ पल गुम हुए
खबर नहीं चली हम कब आपक़े गुलाम हो गये
बस खबर नहीं चली
जिंदगी निकल गयी
सपनो सी है दुनिया मेरी
सपनो सी छबी है
सपनो सा गुजरता पल पल
अगर बीत भी जाए भुल से
बस खबर नहीं चली
जिंदगी निकल गयी
जिंदगी की किताब लिखते
चाहत की शाही नहीं बची
वक्त के पन्ने कब पलट गए
बस खबर नहीं चली
जिंदगी निकल गयी
©ॐप्रकाश शर्मा
Wednesday, July 7, 2021
जिंदगी
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