Tuesday, July 27, 2021

याद वेद की

 याद वेद की

सुबह सुबह पथ पर घुमते हुये
नन्हे कदमोकी आहट याद आई मूझे

सूरज कि कोमल किरने देखकर तुम्हारी
प्यारीसी सुरत याद आई मूझे

नहाते नहाते पानी की बुन्दे देख
तुम्हारी नट्खट मस्ती याद आई मूझे

नन्दलाला की छबि देखकर प्यारी सी
खिलखिलाती हंसी याद आई मूझे

बादलोके पिछे छुपते चान्दको देखकर
तुम्हारी चुलबुली शरारते याद आई मूझे

लेटे लेटे सहज मन मे तुम्हारे प्यारे
कोमल स्पर्श की याद आई मुझे

कोयल की कुहु कुहु सुनकर तुम्हारी
मिठ्ठी मिठ्ठी बोली याद आइ मूझे.

बोझल हुई आंखोमे धुन्धली धुन्धली
तुम्हारी तस्वीर याद आई मूझे

सुबह सुबह पथ पर घुमते हुये
नन्हे कदमोकी आहट याद आई मूझे


 ©ॐप्रकाश शर्मा

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