याद वेद की
सुबह सुबह पथ पर घुमते हुयेनन्हे कदमोकी आहट याद आई मूझेसूरज कि कोमल किरने देखकर तुम्हारीप्यारीसी सुरत याद आई मूझेनहाते नहाते पानी की बुन्दे देखतुम्हारी नट्खट मस्ती याद आई मूझेनन्दलाला की छबि देखकर प्यारी सीखिलखिलाती हंसी याद आई मूझेबादलोके पिछे छुपते चान्दको देखकरतुम्हारी चुलबुली शरारते याद आई मूझेलेटे लेटे सहज मन मे तुम्हारे प्यारेकोमल स्पर्श की याद आई मुझेकोयल की कुहु कुहु सुनकर तुम्हारीमिठ्ठी मिठ्ठी बोली याद आइ मूझे.बोझल हुई आंखोमे धुन्धली धुन्धलीतुम्हारी तस्वीर याद आई मूझेसुबह सुबह पथ पर घुमते हुयेनन्हे कदमोकी आहट याद आई मूझे
©ॐप्रकाश शर्मा
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